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इस बार जमीन पर कुछ अलग कर पाएंगे आकाश आनंद?

मायावती के भरोसे वापसी के बाद आकाश आनंद के सामने BSP संगठन को मजबूत करने, दलित युवाओं को जोड़ने और 2027 के चुनाव से पहले अपनी सियासी उपयोगिता साबित करने की चुनौती है

BSP chief Mayawat withi Akash Anand
मायावती और आकाश आनंद (Photo-ITG)
अपडेटेड 20 अक्टूबर , 2026

बहुजन समाज पार्टी (BSP) में एक बार फ‍िर आकाश आनंद की राजनीतिक वापसी के साथ ही 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की तैयारियों ने एक नया मोड़ ले लिया है. कभी मायावती के राजनीतिक उत्तराधिकारी के तौर पर पेश किए गए आकाश अब अपनी राजनीतिक विश्वसनीयता दोबारा स्थापित करने की चुनौती से जूझ रहे हैं. 

पार्टी के राष्ट्रीय समन्वयक के रूप में उनकी बहाली ने उनके लिए संगठन में काम करने का रास्ता खोल दिया है लेकिन यह वापसी उन्हें पहले जैसी राजनीतिक स्वतंत्रता मिलने का संकेत नहीं है. इसके उलट, आने वाले महीनों में उनके कामकाज, भाषणों और संगठन के साथ तालमेल पर मायावती की निगाहें रहेंगी. 

मायावती ने 18 अक्टूबर को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर सात बिंदुओं वाली पोस्ट के जरिए आकाश के आगामी कार्यक्रमों की जानकारी दी. इसके मुताबिक आकाश 28 अक्टूबर को बुलंदशहर, 2 नवंबर को सहारनपुर, 20 नवंबर को अयोध्या, 22 नवंबर को आगरा और 29 नवंबर को कानपुर नगर में जनसभाओं को संबोधित करेंगे. 

इसके अलावा 26 नवंबर को संविधान दिवस के मौके पर पंजाब में BSP के कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे और 6 दिसंबर को डॉ. भीमराव अंबेडकर के परिनिर्वाण दिवस पर हरिद्वार में आयोजित सेमिनार या जनसभा में शामिल होंगे. इन कार्यक्रमों के जरिए आकाश को उत्तर प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों में पार्टी कार्यकर्ताओं से संवाद करने और चुनावी तैयारियों को गति देने का अवसर मिलेगा.

मायावती के साथ आकाश आनंद के ससुर अशोक सिद्धार्थ (फाइल फोटो)
मायावती के साथ आकाश आनंद के ससुर अशोक सिद्धार्थ (फाइल फोटो)

आकाश की वापसी की कहानी हालांकि इतनी सीधी नहीं है. सितंबर में मायावती ने उन्हें पार्टी की जिम्मेदारियों से हटाने के बाद पार्टी से निष्कासित कर दिया था. इसके पीछे उनके ससुर और BSP के पूर्व नेता अशोक सिद्धार्थ से जुड़ा विवाद अहम वजह बना. इसके बाद आकाश ने 2 अक्टूबर को सोशल मीडिया पर मायावती से माफी मांगते हुए पार्टी में काम करने का एक और मौका मांगा. उन्होंने मायावती को 'बुआ मां' कहकर संबोधित किया और उनके नेतृत्व में काम करने की इच्छा जताई. 

इसके बाद 6 अक्टूबर को उन्हें फिर से राष्ट्रीय समन्वयक की जिम्मेदारी सौंप दी गई. मायावती ने आकाश की वापसी को उनकी राजनीतिक परिपक्वता से जोड़ते हुए कहा कि उन्होंने परिवार और रिश्तेदारों के मुकाबले पार्टी तथा बहुजन आंदोलन को प्राथमिकता देने का फैसला किया है.

हालांकि BSP प्रमुख ने यह भी स्पष्ट किया कि आकाश के राजनीतिक करियर को नुकसान पहुंचाने वाली घटनाओं में अशोक सिद्धार्थ की भूमिका अधिक थी. मायावती ने अशोक सिद्धार्थ की पार्टी में वापसी की संभावना को सिरे से खारिज कर दिया और कहा कि उन्हें किसी भी परिस्थिति में वापस नहीं लिया जाएगा.

इस घटनाक्रम से BSP के भीतर नेतृत्व और अनुशासन को लेकर मायावती का रुख स्पष्ट होता है. आकाश को दूसरा मौका दिया गया है लेकिन पार्टी के फैसलों पर अंतिम अधिकार मायावती के पास ही है. आकाश के सामने अब यह साबित करने की चुनौती है कि वह व्यक्तिगत रिश्तों और राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं से ऊपर संगठन को रख सकते हैं.

दलित राजनीति में नई ऊर्जा लाने की चुनौती

आकाश आनंद के आगामी कार्यक्रमों को सिर्फ उनकी व्यक्तिगत राजनीतिक वापसी के तौर पर देखना पर्याप्त नहीं होगा. ये सभाएं BSP के लिए भी अपनी राजनीतिक ताकत परखने का अवसर हैं. वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में पार्टी उत्तर प्रदेश में एक भी सीट नहीं जीत सकी थी. ऐसे में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले BSP को अपने पारंपरिक मतदाता आधार को मजबूत करने, युवाओं तक पहुंच बनाने और संगठन को सक्रिय करने की जरूरत है.

बुलंदशहर और सहारनपुर से लेकर आगरा और कानपुर तक प्रस्तावित सभाओं के जरिए आकाश को पश्चिमी उत्तर प्रदेश से लेकर मध्य और अन्य क्षेत्रों में पार्टी का संदेश पहुंचाने का मौका मिलेगा. अयोध्या में उनकी सभा का भी राजनीतिक महत्व है. 

इन कार्यक्रमों में आकाश के भाषणों के साथ-साथ उनकी संगठनात्मक क्षमता, कार्यकर्ताओं के साथ संवाद और स्थानीय नेतृत्व को साथ लेकर चलने की शैली पर भी नजर रहेगी. पार्टी नेताओं के मुताबिक, इन सभाओं में 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए BSP उम्मीदवारों की घोषणा भी की जा सकती है. यदि ऐसा होता है तो आकाश की भूमिका केवल भीड़ जुटाने या पार्टी का संदेश देने तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि उन्हें चुनावी रणनीति के क्रियान्वयन में भी अपनी क्षमता दिखानी होगी. 

मायावती के साथ ईशान आनंद (फाइल फोटो)
मायावती के साथ ईशान आनंद (फाइल फोटो)

BSP नेता ने आकाश की सक्रियता को युवा नेतृत्व के लिहाज से महत्वपूर्ण बता रहे हैं. अलीगढ़ के एक BSP नेता बताते हैं, “जब दिल्ली की सड़कों पर विभिन्न मुद्दों को लेकर युवा आंदोलनों में भागीदारी कर रहे हैं, तब BSP भी हाथ पर हाथ रखकर नहीं बैठ सकती.” पार्टी के पास भी युवा नेतृत्व है और आकाश का सार्वजनिक कार्यक्रमों में सक्रिय होना इसी दिशा में एक कदम है. 

हालांकि किसी नेता की सक्रियता का वास्तविक राजनीतिक लाभ तभी सामने आता है जब वह कार्यकर्ताओं को लामबंद करने और मतदाताओं को पार्टी से जोड़ने में सफल हो. राजनीतिक विश्लेषक और मेरठ की चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय में सहायक प्रोफेसर विवेक नौट‍ियाल के मुताबिक, “आकाश के लिए सबसे बड़ी चुनौती BSP के पारंपरिक दलित मतदाता आधार को बनाए रखने के साथ युवा मतदाताओं तक अपनी पहुंच बढ़ाना होगी. पार्टी की राजनीतिक पहचान लंबे समय से बहुजन प्रतिनिधित्व और सामाजिक न्याय के मुद्दों से जुड़ी रही है. ऐसे में आकाश को यह स्पष्ट करना होगा कि वह इन मुद्दों को नई पीढ़ी की आकांक्षाओं के साथ किस तरह जोड़ते हैं.”

विवेक नौट‍ियाल के मुताबिक आकाश आनंद की वापसी BSP के लिए संगठन को सक्रिय करने का अवसर है लेकिन उनकी सफलता का आकलन केवल जनसभाओं में जुटने वाली भीड़ से नहीं होगा. उन्हें कार्यकर्ताओं में भरोसा पैदा करना होगा और यह भी दिखाना होगा कि पार्टी की नीतियों तथा नेतृत्व के प्रति उनकी प्रतिबद्धता स्थिर है.

आकाश की राजनीतिक यात्रा में उतार-चढ़ाव पहले भी रहे हैं. उन्होंने 2024 के लोकसभा चुनाव के लिए उत्तर प्रदेश में पार्टी का प्रचार अभियान शुरू किया था. लेकिन मई 2024 में सीतापुर की एक रैली के दौरान कथित तौर पर दुश्मनी को बढ़ावा देने के आरोप में मामला दर्ज होने के बाद मायावती ने उन्हें पार्टी के पद से हटा दिया था. उन्हें राजनीतिक उत्तराधिकारी घोषित करने का अपना पूर्व फैसला भी वापस ले लिया गया और उनके चुनाव प्रचार पर रोक लगा दी गई थी. 

इसके बाद अगस्त 2026 में उनकी राजनीतिक वापसी की प्रक्रिया आगे बढ़ी. उन्होंने 10 अगस्त को हाथरस और 25 अगस्त को जेवर में पार्टी कार्यकर्ताओं की बैठकों को संबोधित किया और 2027 के चुनाव के लिए दो विधानसभा सीटों के उम्मीदवारों की घोषणा की. 

सितंबर में दोबारा कार्रवाई होने से उनकी गतिविधियां फिर रुक गई थीं. इस पृष्ठभूमि में आगामी जनसभाएं आकाश के लिए खुद को एक भरोसेमंद राजनीतिक चेहरे के रूप में स्थापित करने का अवसर हैं. उन्हें यह भी दिखाना होगा कि वह पार्टी के भीतर किसी विवाद के बिना लंबे समय तक सक्रिय रह सकते हैं.

अशोक सिद्धार्थ से दूरी, ईशान आनंद को अलग जिम्मेदारी

आकाश की वापसी के साथ मायावती ने परिवार के दूसरे सदस्यों की भूमिकाओं को भी अलग-अलग ढंग से तय किया है. एक तरफ आकाश को सार्वजनिक कार्यक्रमों और जनसभाओं के जरिए राजनीतिक गतिविधियां आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी दी गई है वहीं उनके छोटे भतीजे ईशान आनंद को दिल्ली स्थित BSP के केंद्रीय कार्यालय में चुनाव संबंधी कामकाज और कागजी प्रक्रियाओं में सहयोग करने की भूमिका सौंपी गई है. 

ईशान पहले राष्ट्रीय समन्वयक बनाए गए थे लेकिन इस महीने की शुरुआत में आकाश की बहाली के बाद उनकी भूमिका बदल गई. यह व्यवस्था बताती है कि मायावती परिवार के सदस्यों को संगठन में भूमिका देने के बावजूद उनकी जिम्मेदारियों पर नियंत्रण बनाए रखना चाहती हैं. 

आकाश को सार्वजनिक राजनीति में अवसर मिला है लेकिन उन्हें संगठन के भीतर अपनी जगह मजबूत करने के लिए लगातार काम करना होगा. ईशान को दी गई जिम्मेदारी प्रशासनिक और संगठनात्मक कामकाज से जुड़ी है जो आकाश की जनसभाओं से अलग है. 

अशोक सिद्धार्थ का मामला इस पूरे घटनाक्रम का दूसरा महत्वपूर्ण पहलू है. मायावती ने आकाश की राजनीतिक वापसी की राह खोलते हुए अशोक सिद्धार्थ के लिए किसी भी तरह की वापसी की संभावना बंद कर दी है. यह फैसला बताता है कि पार्टी में किसी नेता की भूमिका का निर्धारण व्यक्तिगत संबंधों के बजाय नेतृत्व के फैसले और संगठनात्मक अनुशासन के आधार पर होगा. 

आकाश को भी यह संदेश दिया गया है कि उनकी राजनीतिक प्रगति परिवार से जुड़े विवादों से अलग रहकर ही आगे बढ़ सकती है. पार्टी के एक वरिष्ठ नेता के मुताबिक आकाश के सार्वजनिक कार्यक्रमों में वापसी के बाद उनके भाषणों पर सबकी निगाहें रहेंगी. पार्टी नेतृत्व उनकी संगठनात्मक और सार्वजनिक गतिविधियों पर नजर रखेगा, क्योंकि विधानसभा चुनाव करीब आने के समय शीर्ष स्तर पर किसी नए विवाद की गुंजाइश नहीं है. इस लिहाज से आकाश के लिए यह दौर राजनीतिक परीक्षा जैसा होगा.

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