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घर की दरार सत्ता पर सवाल

मंत्री रेखा आर्य और उनके पति के बीच आरोप-प्रत्यारोप ने उत्तराखंड में चुनावी सरगर्मी बढ़ा दी है. उत्पीड़न की शिकायत, कथित ऑडियो और संपत्ति के आरोपों के बीच धामी सरकार पर जवाब देने का दबाव

Nation: Uttarakhand
एक धार्मिक यात्रा पूरी करने पर मंत्री रेखा आर्य और उनके पति गिरधारी लाल साहू का हरिद्वार के निरंजनी अखाड़े में किया गया स्वागत समारोह
अपडेटेड 3 नवंबर , 2026

उत्तराखंड की राजनीति में इन दिनों नेताओं के घरों से उठते विवाद सत्ता के दरवाजे तक पहुंच रहे हैं. कांग्रेस विधायक सुमित हृदयेश अपनी डिजिटल सुरक्षा और परिवार की निजता को लेकर चिंतित हैं, तो महिला एवं बाल विकास मंत्री रेखा आर्य ने पति के खिलाफ उत्पीड़न और जान से मारने की धमकी की शिकायत दर्ज कराई है.

जवाब में पति गिरधारी लाल साहू ने मंत्री पर भ्रष्टाचार और करीब 210 करोड़ रुपए की कथित अवैध संपत्ति के आरोप लगाए हैं. विधानसभा चुनाव नजदीक आने के साथ निजी रिश्तों की यह लड़ाई सरकार की जवाबदेही की बहस बन गई है.

हल्द्वानी के विधायक सुमित हृदयेश का मामला बताता है कि आशंकाएं सत्तापक्ष तक सीमित नहीं. कद्दावर कांग्रेस नेता रहीं इंदिरा हृदयेश के बेटे सुमित ने फोन हैकिंग और निजी बातचीत के जरिए नेताओं को निशाना बनाने का आरोप लगाया है. शिकायत में उन्होंने अपने मोबाइल, डिजिटल उपकरणों, वाहन और परिवार के फोन से जुड़ी गोपनीय जानकारियों तक अनधिकृत पहुंच तथा उनके दुरुपयोग की आशंका जताई.

कार्रवाई नहीं होने का आरोप लगाते हुए उन्होंने गैरसैंण में आगामी विधानसभा सत्र के दौरान आत्मदाह की धमकी तक दे दी. नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने डीजीपी को पत्र लिखकर मामले की निष्पक्ष जांच करने मांग की है.

लेकिन सबसे ज्यादा सियासी घमासान रेखा आर्य और साहू के बीच आरोपों ने मचाया है. जिस मंत्री के जिम्मे महिलाओं और बच्चों से जुड़ा विभाग है, उन्हीं की उत्पीड़न की शिकायत ने मामले को संवेदनशील बना दिया. पुलिस ने विशेष जांच दल (एसआइटी) गठित किया है. एसआइटी ने मंत्री के बयान दर्ज किए और ऑडियो रिकॉर्डिंग सुरक्षित कर फॉरेंसिक साइंस लैब भेजी है. रिकॉर्डिंग की प्रामाणिकता और उसमें कही गई बातों की जांच आगे की कार्रवाई के लिए अहम होगी.

शिकायत से शुरू खुली लड़ाई
महिला और बाल विकास मंत्री रेखा आर्य की एफआइआर में आरोप है कि साहू ने पहली शादी की बात छिपाकर उनसे विवाह किया. उन्होंने शारीरिक और मानसिक उत्पीड़न, मारपीट, जातिसूचक अपमान तथा जान से मारने की धमकी की शिकायत की है.

साहू की किसी महिला के साथ कथित बातचीत के ऑडियो का हवाला देते हुए मंत्री ने अपने और नाबालिग बच्चों के खिलाफ हत्या की साजिश का आरोप लगाया. ये गंभीर आरोप अभी जांच का विषय हैं. मंत्री का कहना है कि रिकॉर्डिंग सामने आने के बाद उन्हें मामला सार्वजनिक करना जरूरी लगा.

आर्य के मुताबिक, कुछ समय से पति के व्यवहार में बदलाव दिख रहा था. उनके लिए जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल और सहयोगियों को धमकाना इसी का हिस्सा था. उन्होंने पति के कथित अवैध संबंधों का जिक्र करते हुए कहा कि इससे उनके मन में सवाल उठे और पड़ताल के दौरान ऑडियो सामने आया.

मंत्री का दावा है कि उसमें उनके लिए अपमानजनक संबोधन और नुक्सान पहुंचाने की बात का समर्थन सुनाई देता है. उन्होंने कहा, “जिस व्यक्ति के साथ मैंने 22-23 साल पूरी ईमानदारी और समर्पण से बिताए, उसके बारे में ऐसी बातें सुनकर मेरी ही नहीं, सबकी आंखें खुलनी चाहिए.”

एफआइआर के बाद साहू ने वीडियो जारी कर मामले को परिवार तोड़ने की साजिश बताया और पत्नी से शिकायत वापस लेने का आग्रह किया. उसी वीडियो में उन्होंने मंत्री पर विभागों में भ्रष्टाचार और करोड़ों रुपए की अवैध संपत्ति जुटाने के आरोप लगाए. इस तरह सुलह की अपील के साथ आए पलटवार ने विवाद को नया मोड़ दिया. अब सवाल दांपत्य संबंधों से आगे सार्वजनिक पद पर बैठे व्यक्ति की आय और संपत्ति तक पहुंच गया है.

साहू ने 16 अक्तूबर के वीडियो में करीब 210 करोड़ रुपए की कथित अवैध संपत्ति का दावा किया. इसके बाद देहरादून के अधिवक्ता पंकज क्षेत्री ने सतर्कता अधिष्ठान में शिकायत देकर जांच मांगी. उन्होंने चल-अचल संपत्तियों, बैंक खातों, निवेश, एफडी, शेयर, कंपनियों और अन्य वित्तीय हितों के अभिलेख खंगालने का अनुरोध किया है. फिलहाल, यह साहू का आरोप है; जांच के लिए दी गई शिकायत अपने आप उसे प्रमाणित नहीं करती.

रेखा आर्य ने जवाब में चुनावी नामांकन और आय संबंधी घोषणाओं का हवाला दिया है. उनका कहना है कि 2003 में निर्दलीय जिला पंचायत सदस्य के रूप में राजनैतिक सफर शुरू होने से लेकर बाद के चुनावों तक उन्होंने जानकारियां सार्वजनिक की हैं.

उन्होंने कहा, “मेरा सब कुछ पब्लिक डोमेन में है. ऐसा कुछ भी नहीं है जो छिपा हुआ हो.’’ मंत्री ने आरोपों के समय पर भी सवाल उठाया: अगर शिकायतें पहले से थीं तो उनके पति ने अपनी ओर से तहरीर दिए जाने से पहले इन्हें सार्वजनिक क्यों नहीं किया?

यह सवाल विवाद के दो अलग पहलुओं को सामने लाता है. उत्पीड़न की शिकायत पर पुलिस को साक्ष्यों के आधार पर जांच करनी है. संपत्ति और भ्रष्टाचार के आरोपों का जवाब वित्तीय अभिलेखों से मिलेगा. किसी पक्ष की निजी नाराजगी दूसरे के आरोप को स्वतः गलत नहीं बनाती, लेकिन वीडियो में कही बात भी जांच का विकल्प नहीं है. फिलहाल दोनों तरफ की सार्वजनिक बयानबाजी राजनैतिक तापमान बढ़ा रही है.

इसी बीच बरेली-सीतापुर हाइवे के पास लालपुर गांव का एक फार्महाउस चर्चा में आ गया है. करीब पांच एकड़ में फैली इस संपत्ति को लेकर मीडिया रिपोर्टों में कीमत 100 करोड़ रुपए तक बताई गई है.

सफेद खंभों, ऊंचे गुंबदों, मंदिर, स्विमिंग पूल और मछलियों के तालाब वाली इमारत का वर्णन विवाद को और सुर्खियां दे रहा है. हालांकि उसकी कीमत, मालिकाना हक और निर्माण में लगे धन के स्रोत की स्वतंत्र पुष्टि के बिना इन विवरणों से अवैध संपत्ति का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता. विपक्ष के लिए यह मुद्दा बन गया है.

विपक्ष को मिला चुनावी मुद्दा
इस मामले में कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से स्पष्टीकरण मांगा है. उनका सवाल है कि कैबिनेट मंत्री पर उन्हीं के पति इतने बड़े आरोप लगा रहे हैं तो सरकार स्थिति स्पष्ट क्यों नहीं करती?

गोदियाल ने मंत्री की उत्पीड़न की शिकायत पर दुख जताते हुए आम महिलाओं की सुरक्षा का मुद्दा भी उठाया. कांग्रेस नेताओं ने थानों के बाहर प्रदर्शन और एससी-एसटी ऐक्ट के तहत कार्रवाई की मांग की है. पार्टी की प्रदेश प्रभारी कुमारी शैलजा समेत अन्य नेता मंत्री को हटाने की मांग कर रहे हैं.

भाजपा के भीतर से भी टिप्पणी आई है. राज्य के ही एक मंत्री खजान दास ने आर्य के घरेलू हिंसा से पीड़ित होने की बात कहते हुए सवाल उठाया कि ‘‘साहू से जुड़े पुराने आरोपों पर पहले ध्यान क्यों नहीं दिया गया? इससे सरकार के सामने चुनौती बढ़ती है.  शिकायतकर्ता मंत्री को सुरक्षा और न्याय मिले, साथ ही उनके खिलाफ लगे वित्तीय आरोपों की भी निष्पक्ष पड़ताल हो.’’

साहू से जुड़ा विवाद पहली बार सामने नहीं आया है. सितंबर 2024 में बरेली में आर्य ने शिकायत की थी कि कल्पना मिश्रा नाम की महिला ने आधार कार्ड और पासपोर्ट में साहू को अपना पति बताया है. पुलिस ने शिकायत दर्ज कर जांच शुरू की थी. तब पति के पक्ष में खड़ी दिखीं मंत्री अब खुद उनके खिलाफ शिकायतकर्ता हैं.

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी इस मामले को बेहद संवेदनशील मान रहे हैं. उन्होंने कहा कि सभी आरोपों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, जिसे कानून दोषी मानेगा, वही दोषी होगा. उन्होंने प्रदेश भाजपा मुख्यालय में प्रेस के साथ बातचीत के दौरान पूछा कि जब 22 साल तक साथ रहे तो इतने लंबे समय तक आरोप क्यों नहीं लगाए गए? अब इन आरोपों के सामने आने की वजह क्या है? मुख्यमंत्री ने ऑडियो रिकॉर्डिंग के आधार पर किसी को दोषी ठहराने पर भी सवाल उठाए.

लेकिन चुनाव से पहले कांग्रेस इस प्रकरण को महिला सुरक्षा और सुशासन से जोड़ रही है. सरकार के लिए जवाब केवल राजनैतिक बचाव में नहीं, जांच की विश्वसनीयता में होगा. कथित ऑडियो की फॉरेंसिक रिपोर्ट, उत्पीड़न की शिकायत पर कार्रवाई और संपत्ति के आरोपों की पड़ताल आगे की दिशा तय करेंगे. नेताओं के घर से निकला यह विवाद अब सार्वजनिक भरोसे की परीक्षा है.

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