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डार्क मोड

सुराग की कड़ी लाल डायरी

सुप्रीम कोर्ट से पिनाराई को मिली राहत. मगर जांच एजेंसियों के साथ उनकी जद्दोजहद अभी खत्म नहीं हुई

Kerala
केरल के पूर्व मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन की बेटी वीणा
अपडेटेड 3 नवंबर , 2026

विपक्ष के नेता पिनाराई विजयन ने शायद 20वीं सदी के फ्रांसीसी अपराधविज्ञानी डॉ. एडमंड लोकार्ड को कभी नहीं पढ़ा. न ही उनकी बेटी टी. वीणा और दामाद पी.ए. मोहम्मद रियास ने. वरना प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) जिस अहम सबूत के मिलने का दावा कर रहा, वह शायद मौजूद न होता.

लोकार्ड का सिद्धांत सीधा-सा था: हर संपर्क अपने पीछे कोई न कोई निशान छोड़ जाता है. ईडी की कोच्चि इकाई का कहना है कि उसे ‘एक्सालॉजिक रिश्वत केस’ में ऐसे कई निशान मिले हैं.

उनमें से एक है कोचीन मिनरल्स ऐंड रूटाइल लिमिटेड (सीएमआरएल) की ओर से 2017 में दस महीनों के दौरान वीणा को किया गया कथित भुगतान. आरोप है कि यह भुगतान बिना कोई सेवा दिए और बिना कोई बिल पेश किए हुआ. एक अन्य संभावित सुराग लोकार्ड के दौर जैसा ही हो सकता हैः एक लाल डायरी.

यह मामला 2019 में आयकर विभाग की छापेमारी से शुरू हुआ. अलुवा स्थित खनिज प्रसंस्करण कंपनी सीएमआरएल में तलाशी के दौरान कथित तौर पर घोटालों का पूरा खजाना हाथ लगा. रिकॉर्ड में राजनेताओं, ट्रेड यूनियनों, मीडिया संगठनों समेत कई पक्षों को कंपनी का ‘कामकाज सुचारु रूप से चलाने’ के लिए हुए कथित भुगतानों का ब्योरा था.

कागजी सबूतों की एक कड़ी पर विशेष ध्यान गया, जो वीणा और बेंगलूरू स्थित उनकी कंपनी एक्सालॉजिक सॉल्यूशंस तक पहुंचती थी. यह विवाद 2023 में जगजाहिर हुआ. उसके बाद ईडी, सीरियस फ्रॉड इन्वेस्टीगेशन ऑफिस और राज्य सतर्कता विभाग ने विभिन्न सुरागों की पड़ताल शुरू की. आरोपों में 1.72 करोड़ रुपए और 3.28 करोड़ रुपए के भुगतान की बात कही गई.

पूर्व मुख्यमंत्री विजयन पहली जुलाई को तिरुवनंतपुरम में मीडिया से मुखातिब

निशाने पर खास लोग
बड़े आरोपों ने इस केस को और पेचीदा बना दिया है. भाजपा नेता शॉन जॉर्ज ने सीएमआरएल की कथित भुगतान सूची सार्वजनिक की जिसमें कुछ दलों के नेताओं के नाम हैं. इसमें मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन और गृह मंत्री रमेश चेन्नितला का नाम भी है.

मगर जांच का फोकस पिनाराई परिवार है. 21 अक्तूबर को सुप्रीम कोर्ट से दखल से पहले उन्हें अदालतों से भी राहत नहीं मिल पाई थी. पुलिस और सतर्कता विभाग की जांच पर सुप्रीम कोर्ट की एक हफ्ते की रोक से भी 81 वर्षीय इस पूर्व मुख्यमंत्री को ईडी की कार्रवाई से राहत नहीं मिल जाती.

ईडी ने उन्हें 23 अक्तूबर को पूछताछ के लिए तलब किया है. ऐसे में यह महज अस्थायी नैतिक राहत भर है. इससे पहले, नौ अक्तूबर को केरल हाइकोर्ट की एकल पीठ ने एफआइआर दर्ज करने का आदेश दिया था.

12 अक्तूबर को राज्य के सतर्कता विभाग और भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने दो केस दर्ज किए. इनमें एक मामला कॉर्पोरेट लेन-देन, तो दूसरा कथित हवाला लेन-देन से जुड़ा है. फिर हाइकोर्ट की खंडपीठ ने एकल पीठ के आदेश में दखल से मना कर दिया. अब सुप्रीम कोर्ट ने पिनाराई को आदेश पर पुनर्विचार के लिए खंडपीठ का रुख करने की अनुमति दी है.

एक डायरी, एक व्हॉट्सऐप चैट
किसी न किसी मोड़ पर यह कहानी फिर उस लाल डायरी तक लौटेगी, जिसे ईडी सबूतों की कड़ी में एक अहम कड़ी बता रहा है. ईडी का कहना है कि 27 मई को वीणा से जुड़े ठिकानों पर तलाशी के दौरान उसे यह डायरी मिली थी. इसमें लेन-देन से जुड़े हस्तलिखित नोट्स हैं.

एजेंसी इन प्रविष्टियों को वीणा का लिखा बताते हुए कहती है कि इनकी जांच बैंक रिकॉर्ड, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों और अन्य दस्तावेजों के साथ की जानी चाहिए. वहीं, पिनाराई ने ईडी के इस दावे को सिरे से खारिज किया और कहा कि “ऐसी कोई डायरी कभी थी ही नहीं” और अभियोजन चलाने के लिए कोई मामला बनता ही नहीं.

ईडी के मुताबिक, सीएमआरएल के साथ हुए समझौते के दो हिस्से थे. पहला, एक्सालॉजिक को हर महीने तीन लाख रुपए के रिटेनर शुल्क पर काम सौंपा गया था. दूसरा, वीणा को निजी हैसियत से आइटी और मार्केटिंग सलाहकार के रूप में पांच लाख रुपए महीने पर अलग से नियुक्त किया गया था.

ईडी की एक रिपोर्ट के मुताबिक, वीणा को जनवरी से अक्तूबर 2017 के बीच बिल जमा करने से पहले 45 लाख रुपए मिले थे. एजेंसी का आरोप है कि ये समझौते महज दिखावा थे और इनका एकमात्र आधार यह था कि वीणा तत्कालीन मुख्यमंत्री की बेटी थीं. 

कथित तौर पर बेहिसाबी रकम विदेश भेजे जाने की एक अलग कड़ी में भी इस डायरी का जिक्र है. ईडी का आरोप है कि डायरी की एक प्रविष्टि में दुबई में रहने वाले एक सहयोगी वी.पी. फैजाज को 3.49 लाख यूएई दिरहम (तब करीब 85 लाख रुपए) मिलने का जिक्र है.

ईडी के अनुसार, कोझिकोड के के. वारिश ने बिचौलिए की भूमिका निभाने की बात मानी है. आरोप है कि वह रियास के निर्देश पर भेजी गई नकदी लेता था और फिर हवाला के जरिए फैजाज तक पहुंचाता था. जांचकर्ताओं का कहना है कि वारिश के फोन से मिले व्हाट्सऐप चैट इस दावे की पुष्टि करते हैं.

इनमें कथित तौर पर ऐसे नामों से सेव किए गए संपर्क भी हैं, जिनमें ‘हवाला’ का जिक्र है. करेंसी नोटों की तस्वीरें और दिरहम को रुपए में बदलने की दर बताने वाली तालिकाएं भी मिली है. लोकार्ड यह सब देखकर हैरान रह जाते.

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