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सर्पदंश से मौतों में कर्नाटक क्यों आगे

सांप काटने को दर्ज किए जाने योग्य बीमारी घोषित करने वाला पहला राज्य कर्नाटक अब तकरीबन 100 फीसद मामलों को रिपोर्ट कर रहा

सांकेतिक एआइ तस्वीर
अपडेटेड 7 अगस्त , 2026

कर्नाटक में बीते तीन साल में सर्पदंश यानी सांप काटने के दर्ज मामलों में ढाई गुना की वृद्धि हुई है. यह संख्या साल 2023 के 6,596 से बढ़कर 2025 में 16,805 हो गई. इसी दौरान इससे होने वाली मौतों की संख्या 19 से बढ़कर 160 पहुंच गई. वैसे, इन आंकड़ों में आई इस तेज वृद्धि की एक अहम वजह है.

दरअसल, फरवरी 2024 में कर्नाटक सर्पदंश को दर्ज किए जाने योग्य बीमारी घोषित करने वाला देश का पहला राज्य बना. यानी सर्पदंश के सभी मामलों और उनसे होने वाली मौतों की सूचना देना और उनका पंजीकरण अनिवार्य हो गया. कर्नाटक के स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक, निजी अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों से ऐसे मामलों की सूचना देने में सुधार हुआ है. इतना ही नहीं, स्टेट सर्विलांस यूनिट (एसएसयू) मीडिया में प्रकाशित मामलों को भी अपने रिकॉर्ड में शामिल करती है.

कर्नाटक के स्वास्थ्य और परिवार कल्याण आयुक्त गुरुदत्त हेगड़े कहते हैं, ‘‘हम इसे बहुत गंभीरता से लेते हैं. हम यह भी पक्का करते हैं कि सर्पदंश से होने वाली हर मौत का ऑडिट उसी तरह किया जाए, जैसे मातृ मृत्यु या बाल मृत्यु का किया जाता है.’’ उनके मुताबिक, हरेक मामले का अलग-अलग विश्लेषण करने से मौत के कारणों और व्यवस्था की कमियों का पता चलता है. इसमें अस्पताल जाने में लापरवाही, परिवहन सुविधा या सर्पविष-रोधी दवा का अभाव सरीखी समस्याएं शामिल हो सकती हैं.

हेगड़े कहते हैं, ‘‘मृत्यु का ऑडिट करने पर हमें पता चल जाता है कि उस विशेष दिन आखिर समस्या क्या थी.’’ घने वन क्षेत्र वाले राज्यों में शामिल कर्नाटक में सर्पदंश की घटनाएं अपेक्षाकृत ज्यादा होती हैं. ऐसे में यह यहां महत्वपूर्ण पहल है.

इसके बाद, नवंबर 2024 में केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने भी सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को सर्पदंश को दर्ज किए जाने योग्य बीमारी घोषित करने की सलाह दी. राज्यसभा में केंद्र सरकार के जवाब के अनुसार, फिलहाल 12 राज्यों ने सर्पदंश के मामलों और उससे होने वाली मौतों को दर्ज किए जाने योग्य बीमारी घोषित किया है. वहीं, 2025 में देश में सर्पदंश के 1,40,302 मामले और 429 मौतें दर्ज की गईं. मौतों के मामले में कर्नाटक सबसे ऊपर रहा.

अपने विश्लेषण के आधार पर कर्नाटक स्वास्थ्य विभाग ने सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को निर्देश दिया है कि वे सर्पविष-रोधी दवा की कम-से-कम 10 शीशियां अनिवार्य रूप से उपलब्ध रखें. हेगड़े के मुताबिक, अगला कदम एंबुलेंस सेवाओं की बेहतर मैपिंग और समन्वय पक्का करना है ताकि सर्पदंश के शिकार को वक्त रहते निकटतम चिकित्सा केंद्र तक पहुंचाया जा सके.

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