scorecardresearch

पहाड़ी प्रदेश में चढ़ा सियासी पारा

उत्तराखंड में अगले साल विधानसभा चुनाव के मद्देनजर दोनों प्रमुख पार्टियों की सक्रियता बढ़ी

मंत्रिमंडल विस्तार के बाद नए मंत्रियों के साथ कैबिनेट की बैठक करते मुख्यमंत्री धामी
अपडेटेड 14 अप्रैल , 2026

- एम.सी. पांडेय

अपने कार्यकाल के पांचवें साल की शुरुआत में अब जाकर धामी कैबिनेट पूर्ण रूप से 12 सदस्यों वाली हो गई. वह भी तब जब अगले साल राज्य में विधानसभा चुनाव होने हैं. मंत्रिमंडल में किए इस विस्तार के जरिये सरकार ने जातीय समीकरण साधने की कोशिश की है.

इसी के मद्देनजर भरत चौधरी और राम सिंह कैड़ा के रूप में दो मंत्री ठाकुर समाज से, तो दलित समाज के खजान दास, ब्राह्मण समाज के मदन कौशिक एवं पंजाबी समाज के प्रदीप बत्रा को मंत्रिमंडल में शामिल किया गया है.

क्षेत्रीय संतुलन को देखें तो नए मंत्रियों में एक मंत्री कुमाऊं मंडल के पहाड़ी क्षेत्र से हैं, जबकि दो मंत्री गढ़वाल मंडल के पहाड़ी क्षेत्र और दो मंत्री मैदानी क्षेत्रों से शामिल किए गए. 

वहीं, पार्टियों के भीतरी राजनैतिक दृष्टि से देखें तो पांच नए मंत्रियों में तीन फिर से कांग्रेस पृष्ठभूमि से जुड़े हैं और ऐसे में भाजपा के अपने कोर नेताओं को इसमें तरजीह नहीं मिली है. इन तीन को मिलाकर 12 सदस्यीय मंत्रिमंडल में सात मंत्री कांग्रेस पृष्ठभूमि से हैं. इन सात में से अधिकतर 2014 के बाद कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुए. इसको लेकर विपक्षी कांग्रेस सरकार पर तंज कर रही है कि भाजपा के नेता तो महज पार्टी की ही सेवा के लिए हैं,

मंत्री बनकर राज करने के लिए नहीं. वैसे, राजनीति के जानकार इसे राज्य की बदलती राजनैतिक धारा और भाजपा की रणनीतिक मजबूती करार दे रहे हैं. मगर, मंत्रिमंडल विस्तार में किसी महिला को शामिल न करना और पूरी कैबिनेट में मात्र एक ही महिला मंत्री का होना महिलाओं के प्रतिनिधित्व के दावों की पोल भी खोलता है. 

हालांकि, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के विरोधी उम्मीद कर रहे थे कि आगामी चुनाव को देखते हुए और सत्ता विरोधी रुझान के चलते प्रदेश में सरकार का मुखिया बदला जाएगा. लेकिन धामी ने मंत्रिमंडल विस्तार के जरिए अपनी मजबूत स्थिति का संकेत दे दिया है. मुख्यमंत्री के विरोधी दिल्ली की दौड़ लगा रहे थे. पर धामी ने अपने इस कार्यकाल के आखिरी साल में मंत्रिमंडल विस्तार में अपनी छाप छोड़कर विरोधियों के मंसूबों पर पानी फेर दिया.

उन्होंने न केवल 'चार साल बेमिसाल' के नारे को गढ़ा, बल्कि इसका जश्न मनाने के लिए हरिद्वार और हल्द्वानी में आयोजित रैली में केंद्रीय मंत्री अमित शाह और राजनाथ सिंह ने उनकी जमकर तारीफ की. राजनाथ सिंह ने तो कहा कि वे अब 'धाकड़ धामी' से 'धुरंधर धामी' हो गए हैं. इस तरह से धामी ने संकेत दे दिया है कि उन्हें हाइकमान का आशीर्वाद हासिल है. मुख्यमंत्री ने देहरादून में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यक्रम की स्वीकृति मिलने पर अब उस आयोजन की तैयारियों के लिए अपनी मशीनरी को झोंक दिया है.

वहीं, दूसरी ओर राज्य की मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस भी अब नेताओं को अपने संगठन में शामिल कराकर एक संदेश देने में जुटी है. बीते हफ्ते कांग्रेस के प्रदेश स्तरीय नेताओं के साथ दिल्ली गए तीन पूर्व विधायकों और तीन अन्य नेताओं ने कांग्रेस में शामिल होकर भाजपा में बेचैनी बढ़ा दी है. उत्तराखंड कांग्रेस प्रभारी एवं सांसद कुमारी शैलजा की अगुवाई में भाजपा के पूर्व विधायक राजकुमार ठुकराल, पूर्व विधायक नारायण पाल, भाजपा के पूर्व विधायक भीमलाल आर्य, रुड़की के भाजपा के पूर्व मेयर गौरव गोयल, मसूरी नगर पालिका परिषद के पूर्व अध्यक्ष और भाजपा नेता अनुज गुप्ता एवं जिला नैनीताल के वरिष्ठ नेता लाखन सिंह नेगी कांग्रेस में शामिल हो गए.

इस मौके पर शैलजा ने भाजपा की उत्तराखंड सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि प्रदेश आकंठ भ्रष्टाचार में डूबा है, कानून व्यवस्था बदहाल है, बेरोजगारी बढ़ी है और महिलाओं के खिलाफ हिंसा समेत आपराधिक घटनाओं में इजाफा हुआ है. इसके साथ ही उन्होंने सरकार पर अवैध खनन में शामिल होने के भी आरोप लगा दिए.

कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने तो दावा किया कि आने वाले दिनों में भाजपा के कई और बड़े चेहरे कांग्रेस में शामिल होंगे. भाजपा के छह नेताओं को पार्टी में शामिल कराकर कांग्रेस ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि प्रदेश में सरकार के खिलाफ सत्ताविरोधी रुझान है और लोग भाजपा छोड़ने को उतावले हैं.

कांग्रेस आलाकमान ने 2027 के विधानसभा चुनाव के मद्देनजर संगठन को मजबूत करने के लिए राज्य को 8 जोन (सेक्टर) में विभाजित किया है. इन जोन की कमान दिग्गज नेताओं को सौंपी गई है, जिसका उद्देश्य बूथ स्तर पर पकड़ बनाना और सत्ता में वापसी सुनिश्चित करना है. यह कदम पार्टी की जमीनी मजबूती बढ़ाने और भाजपा के सामने कड़ी चुनौती पेश करने के लिए उठाया गया है.

दिल्ली के कांग्रेस मुख्यालय में उत्तराखंड कांग्रेस प्रभारी शैलजा की मौजूदगी में अन्य दलों को छोड़ कांग्रेस में शामिल होते नेता

वैसे, कांग्रेस के उठाए मुद्दों को निस्तेज करने के लिए भाजपा अपनी हिंदुत्ववादी राजनीति का सहारा लेती है. मसलन, उसने अपनी सरकार में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) बिल और धर्म परिवर्तन विरोधी कानून के जरिए सियासी संदेश दिया है. इसके साथ ही, जगह-जगह धार्मिक मुद्दे खड़े करने की कोशिश भी की जाती है. दूसरी ओर, कांग्रेस कुछ मुद्दों को उठाती तो है, मगर उन्हें किसी अंजाम तक पहुंचाए बिना ही शांत बैठ जाती है. इसका नतीजा यह हुआ है कि कांग्रेस प्रदेश की सत्ता में अपनी वापसी का संदेश देने में फिलहाल कामयाब होती नहीं दिख रही. इससे इतर, धामी लगातार जनता के बीच सक्रिय हैं और रोड शो में भीड़ जुटाकर सत्ता विरोधी रुझान को लोगों के मन से बाहर निकालने की सफल कोशिश करते दिख रहे हैं. जाहिर है, इस सियासी समर में फिलहाल धामी भारी पड़ते नजर आ रहे हैं.

इंडिया टुडे से पुष्कर सिंह धामी की बातचीत 

इतने लंबे समय के बाद मंत्रिमंडल विस्तार क्या आगामी चुनाव को देखते हुए किया गया?
मंत्रिमंडल का विस्तार कुछ समय से लंबित था. लेकिन अब मंत्रिमंडल पूरा हो गया है. पूरे प्रदेश और सभी समुदायों को ध्यान में रखकर मंत्रिमंडल में स्थान दिया गया है. यह कहना ठीक नहीं है कि चुनाव को ध्यान में रखकर यह सब किया गया है. चुनाव के लिए तो हमारी पार्टी हमेशा ही तैयार रहती है. यह सब इसलिए किया गया ताकि हमारी सरकार बेहतर तरीके से प्रदेश की सेवा कर सके.

विपक्ष का आरोप है आपकी सरकार में कांग्रेस से आए लोगों की बहुलता है. इस पर आप क्या कहेंगे?
यह भी ठीक नहीं है. एक बार जो पार्टी में आ गया वह पार्टी का हो गया. फिर कोई भेदभाव नहीं. 

मंत्रिमंडल के विस्तार के ठीक बाद तीन पूर्व विधायक भाजपा छोड़कर कांग्रेस में शामिल हो गए. इसको कैसे देखते हैं?
जो लोग कांग्रेस में गए हैं, वे भाजपा में नहीं थे. राज कुमार ठुकराल भी पांच साल पहले पार्टी से बाहर कर दिए गए थे. वे पिछला चुनाव भी निर्दलीय लड़े थे. इन लोगों को कहीं जगह नहीं मिल रही थी, इसलिए चले गए.

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल की बातचीत

बाहरी नेताओं को कांग्रेस में शामिल कराने से क्या पार्टी को कोई फायदा होगा?
हमने सोच-समझकर और पूरी तरह से इन नेताओं की कांग्रेस के प्रति समर्पण को देखकर ही इन सबको पार्टी में शामिल किया है. चुनाव के बीच किसी तरह के मतभेद को लेकर भी सबसे बात स्पष्ट की गई है. ये सभी नेता बिना किसी शर्त या प्रलोभन के कांग्रेस के प्रति निष्ठा दिखाते हुए पार्टी को सत्ता में लाने के उद्देश्य के साथ शामिल हुए हैं. 

संगठन की मजबूती और बूथ मैनेजमेंट को लेकर कांग्रेस कितनी जागरूक है?
बूथ मैनेजमेंट के लिए कमेटियां गठित करने की पूरी तैयारी चल रही है. इसको लेकर सभी लोग लगातार कार्यकर्ताओं के संपर्क में हैं. इस काम में कार्यकर्ता पूरी ताकत से जुटे हुए हैं. 

बीते जिला पंचायत चुनाव में जो नतीजे दिखे, विधानसभा चुनाव में वैसा न हो इसकी कुछ तैयारी है?
सत्ता के बल पर जिला पंचायत के चुनाव को भाजपा सरकार ने जबरन चुराया था. यह तय है कि आगामी चुनाव में जनता सरकार को उसकी इस हरकत का भी जवाब देगी.

Advertisement
Advertisement