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कोटा का नुकसान सीकर का फायदा

पिछले तीन दशक से मेडिकल और इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी का राष्ट्रीय केंद्र रहे कोटा की चमक अब फीकी पड़ रही. सीकर शहर अब उसकी कोचिंग इंडस्ट्री की बादशाहत को कड़ी चुनौती दे रहा

सीकर के एक कोचिंग में JEE- नीट की तैयारी के लिए उमड़ा विद्यार्थियों का हुजूम
अपडेटेड 3 मार्च , 2026

राजस्थान का शांत-सा दिखने वाला सीकर अब नौजवानों की नई ऊर्जा के साथ कदमताल कर रहा है. दरअसल, यह शहर अब मेडिकल और इंजीनियरिंग की परीक्षाओं की तैयारी करने वाले स्टूडेंट्स से गुलजार है और यहां इनकी संख्या में 30-40 फीसद का इजाफा हुआ है.

इसी ओर इशारा करते हुए बीते दिनों राजस्थान के नगरीय विकास मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने कहा, ''नशे और आत्महत्या के बढ़ते मामलों के कारण दूसरे राज्यों के लोगों का कोटा से मोहभंग हुआ है.

अभिभावक भी अब बच्चों को वहां भेजने से कतराते हैं. इसी कारण सीकर जैसा नया कोचिंग हब विकसित हुआ है.'' वे कोटा में स्टूडेंट्स की घटती संख्या पर बयान दे रहे थे. 

असल में, बीते दो-तीन साल में कोटा में इन परीक्षाओं की तैयारी के लिए आने वाले स्टूडेंट्स की संख्या में 50 फीसद तक की कमी आई है. कोटा हॉस्टल एसोसिएशन और सीकर कोचिंग इंडस्ट्री के पिछले कुछ साल के आंकड़े खर्रा की बात की पुष्टि करते हैं. साल 2022-23 में कोटा में नीट यूजी और जेईई की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों की संख्या 2 लाख 14 हजार थी जो अब घटकर 90 हजार से भी कम हो गई है. वहीं, सीकर में मेडिकल, इंजीनियरिंग और सैन्य भर्तियों की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों की संख्या करीब 1 लाख 25 हजार तक पहुंच गई है जो साल 2022-23 तक 50-55 हजार के बीच थी.  

ऐसा भी नहीं है कि जेईई या नीट (राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा) यूजी में छात्र-छात्राओं का रूझान कम हुआ हो. राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) के आंकड़ों के मुताबिक, साल 2021 में देश में संयुक्त प्रवेश परीक्षा (जेईई) के लिए 10.48 लाख विद्यार्थियों ने रजिस्ट्रेशन कराया था जो 2025 तक करीब 68 फीसद बढ़कर 15.39 लाख हो गया है. इसी तरह नीट यूजी के लिए 2021 में 16.14 लाख विद्यार्थियों ने रजिस्ट्रेशन किया था, जिनकी संख्या अब उससे 70 फीसद बढ़कर 2024 में 24.06 लाख तक पहुंच गई. मगर कोटा के कोचिंग केंद्रों में विद्यार्थियों की संख्या घटकर पहले के मुकाबले आधी से भी कम रह गई. 

कोटा का आर्थिक विकास भी अब सीकर शिफ्ट हो रहा है. कोटा हॉस्टल एसोसिएशन के अनुसार, साल 2022-23 तक कोटा को जेईई और नीट यूजी के विद्यार्थियों से सालाना 6,500 करोड़ रु. का राजस्व मिल रहा था, जो अब घटकर 3,500 करोड़ रु. से भी कम रह गया है. वहीं, साल 2022-23 तक सीकर जिले में कोचिंग इंडस्ट्री से 1,000 करोड़ रुपए का राजस्व भी नहीं मिल पा रहा था जो अब बढ़कर 4 हजार करोड़ रुपए को छूने लगा है. 

कोटा में सबसे बड़ा झटका हॉस्टल इंडस्ट्री को लगा है. कोटा के कोरल पार्क इलाके में पांच सितारा सुविधाओं वाले अधिकतर हॉस्टल अब वीरान पड़े हैं. यह इलाका पहले आने वाले छात्रों के बढ़ते दबाव को देखते हुए विकसित हुआ था. कोटा हॉस्टल एसोसिएशन के अध्यक्ष नवीन मित्तल कहते हैं, ''कोटा में हॉस्टल संचालकों पर करीब दो हजार करोड़ रुपए का कर्ज है. यहां चार हजार हॉस्टल में ढाई लाख से ज्यादा कमरे हैं. इसके अलावा करीब 10 हजार फ्लैट और 50 हजार पीजी उपलब्ध हैं. छात्रों की संख्या घटने से कोटा की अर्थव्यवस्था संकट में आ गई है.'' 

दरअसल, कोचिंग इंडस्ट्री में सीकर की धमक बढ़ने के कई कारण हैं. सबसे बड़ा कारण सीकर का सुरक्षित माहौल है जिसने अभिभावकों और बच्चों को इसकी ओर रुख करने के लिए प्रेरित किया. वहीं, कोटा महानगरीय भाग-दौड़ भरे शहर के तौर पर विकसित हुआ है जबकि सीकर कोटा की अपेक्षा शांत और किफायती शहर माना जाता है. कोटा से छात्रों का झुकाव कम होने की एक वजह बीते कुछ वर्षों में वहां हुई आत्महत्या की घटनाएं भी रही हैं. पुलिस के आंकड़ों के मुताबिक, पिछले 12 साल में कोटा में कोचिंग संस्थानों में पढ़ने वाले 150 बच्चों ने सुसाइड किया. इसकी वजह से कोटा की देशभर में काफी फजीहत हुई. 

सीकर के दिग्गज शैक्षणिक संस्थान भारतीय समूह से जुड़े राधाकिशन रणवां कहते हैं, ''कोटा बड़ा शहर है जिसके कारण वहां सुरक्षा कम मिल पाती है जबकि सीकर कम दूरी में बसा शहर है जहां बच्चों पर आसानी से नजर रखी जा सकती है. सीकर में कोटा के मुकाबले फीस भी 30 से 40 फीसद कम है. कोटा में बच्चों पर हॉस्टल में रहने का दबाव रहता है जबकि सीकर में बच्चे अभिभावकों के साथ किराए पर रह सकते हैं.'' 

कोटा के मुकाबले सस्ता होने की वजह से सीकर में मध्यवर्गीय परिवार आसानी से अपने बच्चों की तैयारी करवा सकते हैं. कोचिंग इंडस्ट्री के जानकार मानते हैं सीकर में कोचिंग और हॉस्टल की फीस, रहने-खाने और अन्य व्यक्तिगत खर्चों पर प्रति छात्र औसतन ढाई लाख रुपए खर्च पड़ता है जबकि कोटा में इन्हीं चीजों पर 4 से 5 लाख रुपए का खर्च बैठता है. सीकर मेडिकल और इंजीनियरिंग के अलावा सिविल सेवा, शिक्षक, पुलिस भर्ती, एनडीए व सैन्य भर्ती सरीखी अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी का भी प्रमुख केंद्र है. 

कोटा के कोरल पार्क में वीरान पड़े हॉस्टल

यहां फिलहाल कोटा से ज्यादा कोचिंग संस्थान हैं. कोटा में एलन, आकाश, मोशन, रेजोनेंस, करियर पॉइंट, वाइब्रेंट एकेडमी, बंसल क्लासेज और न्यूक्लियस एजुकेशन सरीखे संस्थान हैं. वहीं सीकर में एलन, आकाश, बंसल, रेजोनेंस के अलावा करियर लाइन कोचिंग, गुरुकृपा, मैट्रिक्स, प्रिंस जैसे नामी कोचिंग संस्थान भी हैं. सीएलसी सीकर का सबसे पुराना कोचिंग संस्थान है जो 1996 से संचालित है. सीकर में मेडिकल और इंजीनिरिंग की तैयार कराने वाला सबसे बड़ा नाम 2007 से चल रहा गुरुकृपा करियर इंस्टीट्यूट है. इसमें स्टूडेंट्स की तादाद इतनी ज्यादा है कि सीकर शहर में ही इसके 12 केंद्र हैं. 2009 से चल रहा प्रिंस करियर पायनियर (पीसीपी) और 2014 से चल रहा मैट्रिक्स भी प्रमुख संस्थान हैं. 

पीसीपी के चेयरमैन पीयूष सुंडा कहते हैं, ''सीकर में महानगरों और बड़े शहरों की तरह चकाचौंध नहीं है, इससे बच्चे अन्य चीजों की तरफ डायवर्ट होने की जगह पूरा ध्यान पढ़ाई पर ही लगाते हैं. सीकर ने पिछले कुछ सालों में जेईई और नीट यूजी में टॉप रैंक बनाई है.''

असल में, राजस्थान का शेखावाटी इलाका पुराने समय से ही शिक्षा का केंद्र रहा है. इस इलाके से निकलकर देशभर में अपना औद्योगिक साम्राज्य स्थापित करने वाले यहां के उद्योगपतियों ने शिक्षा पर खास ध्यान दिया. शेखावाटी से जुड़े जाने-माने उद्योगपति बिड़ला, बजाज, डालमिया, मित्तल, सिंघानिया, पिरामल, गोयनका ने यहां अपने नाम से शैक्षणिक समूह स्थापित किए. इसी का नतीजा है कि शेखावाटी इलाके में आने वाले सीकर, झुंझुनूं और चूरू में शिक्षण संस्थानों का जाल बहुत व्यापक है. सीकर शहर में ही 800 से ज्यादा निजी और सरकारी स्कूल हैं. जिले में यह संख्या 2,500 तक पहुंच जाती है.  

यहां के शास्त्री शिक्षण समूह के अनिल बाटड़ कहते हैं, ''सीकर आज देश में एजुकेशन सिटी के तौर पर उभर रहा है. यहां 20 राज्यों के सवा लाख से ज्यादा विद्यार्थी तैयारी के लिए आ रहे हैं. इसने न सिर्फ सीकर की अर्थव्यवस्था को बूस्ट किया है बल्कि 20 हजार परिवारों को रोजगार भी दिया है.''

सीकर के एजुकेशन हब बनने की बड़ी वजह यहां के कोचिंग संस्थाओं की ओर से विकसित किया गया सुव्यवस्थित शैक्षणिक माहौल है. संस्थान छात्रों के लिए आधुनिक क्लासरूम, अनुभवी फैकल्टी, नियमित टेस्ट सीरीज, डाउट काउंटर, डिजिटल लाइब्रेरी और पर्सनल मेंटरशिप जैसी सुविधाएं दे रहे हैं, वहीं हॉस्टलों के किफायती और सुरक्षित माहौल ने अभिभावकों की चिंता घटाई है. 

सीकर और कोटा की हॉस्टल व्यवस्था का सबसे बड़ा अंतर यह है कि कोटा में निजी हॉस्टल ज्यादा संचालित हैं जबकि सीकर में कोचिंग संस्थानों ने खुद के हॉस्टल तैयार किए हैं. इससे पढ़ाई और रहने की सुविधा एक जगह पर उपलब्ध हो सकी है और बच्चों को लेकर अभिभावकों की चिंता भी कम हुई है. राधाकिशन रणवां कहते हैं, ''सीकर में कोचिंग संस्थानों ने खुद के हॉस्टल बनाए हैं जिनमें साफ-सुथरे कमरे, 24 घंटे वाइ-फाइ, सीसीटीवी सुरक्षा, पौष्टिक भोजन, मेडिकल सहायता और स्टडी रूम जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं.''

जानकार यह भी मानते हैं कि जैसे-जैसे सीकर कोचिंग हब के तौर पर विकसित हो रहा यहां भी कोटा जैसी बुराइयां घर करने लगी हैं. छात्रों पर मानसिक दबाव और नशा यहां भी पैर पसारने लगा है. वैसे, कोटा के मुकाबले यहां ऐसी चीजें बहुत कम हैं, मगर बीते कुछ दिनों में यहां कई ऐसी घटनाएं हुई हैं जिनसे शहर की प्रतिष्ठा को धक्का लगा है. मानसिक दबाव के चलते यहां बीते छह माह में तीन छात्रों ने आत्महत्या कर ली, वहीं 10 छात्र बिना बताए हॉस्टल छोड़कर भाग गए. सीकर के प्रमुख कोचिंग संस्थानों के आस-पास नशे की कुछ गतिविधियां भी पकड़ी गई हैं. पंजाब के राज्यपाल और पूर्व नेता प्रतिपक्ष गुलाबचंद कटारिया भी सीकर में छात्रों पर बढ़ते मानसिक दबाव को लेकर चिंता जता चुके हैं.

वहीं, राज्य के शिक्षा मंत्री मदन दिलावर कहते हैं, ''कोटा के बाद सीकर भी जेईई और नीट यूजी का कोचिंग हब बन रहा है. यह राजस्थान के लिए बड़ी उपलब्धि है. सीकर भी अब उन्नति के नए शिखर छूएगा. शेखावाटी इलाका शिक्षा के क्षेत्र में हमेशा अग्रणी रहा है. कोचिंग हब बनने से छात्रों को स्थानीय स्तर पर बेहतर पढ़ाई का माहौल मिल सकेगा.''

सीकर में तेजी से कोचिंग इकोसिस्टम विकसित हो रहा है, आने वाले वर्षों में राज्य के शिक्षा-मानचित्र पर यह शहर महज विकल्प नहीं, बल्कि मुख्य केंद्र के रूप में उभरेगा. 

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