● सेमीफाइनल में खेलने का मौका मिलने से पहले आप करीब साल भर तक एकदिवसीय राष्ट्रीय टीम में नहीं थीं. उस दौर से आप कैसे निबटीं?
टीम में न होना मेरे लिए बेहद दुखद था. आत्मविश्वास बढ़ाने वाला पहला मैसेज मेरे पीछे खड़ी जेएसडब्ल्यू स्पोर्ट्स की तरफ से आया, जिसने कहा, ''हम आपके साथ हैं.’’ फिर तो बस आगे बढ़ती गई, सामने आई चीजों को स्वीकारा. लगता है ऊपर वाले ने मेरी सारी मेहनत देखी और फिर से मुझे टीम में भेजा.
● 21 साल की लड़की के लिए टूर्नामेंट में करो या मरो वाली स्थिति में आकर अच्छा प्रदर्शन करना आसान नहीं. आपके मन में क्या चल रहा था?
टीम का हिस्सा बनाए जाने पर मुझे बेहद खुशी हुई लेकिन टूर्नामेंट अहम पड़ाव पर पहुंच चुका था इसलिए मुझ पर सेमीफाइनल में अच्छा प्रदर्शन करने का दबाव था. मैं सकारात्मक सोच के साथ टीम का हिस्सा बनी और खुद से कहा: यह दिखाने का समय है कि शेफाली वर्मा क्या बला है.
● वर्ल्ड कप जीतना महिला क्रिकेट टीम के लिए एक टर्निंग पॉइंट है. क्या आपको लगता है कि इस बीच माहौल में किसी तरह का कोई बदलाव आया?
हम चाहते थे कि एक बार वर्ल्ड कप जीतें तो चीजें ठीक हो जाएंगी. उम्मीद है अब हमारे बारे में उल्टी-सीधी राय नहीं बनाई जाएगी और हम भी अपनी पहचान बना पाएंगे. अगले साल ट्वेंटी-20 वर्ल्ड कप के लिए हमसे उम्मीदें बढ़ गई हैं.
● आप हर जगह छाई हैं. आपको स्पॉटलाइट में आना, लड़कियों के लिए रोल मॉडल बनना कितना भा रहा है?
बहुत मजा आ रहा है. मुझे अलग-अलग तरह के कपड़े पहनना और अच्छा दिखना पसंद है. हमेशा सोचती हूं कि अपने जैसे युवाओं को कैसे प्रोत्साहित करूं. मैं खेल को अपना सर्वश्रेष्ठ देने की कोशिश करती हूं. मैं अभिभावकों को प्रेरित करना चाहती हूं कि वे बच्चों को बाहर निकलने दें. उम्मीद है कि विश्व कप की जीत के बाद सभी लड़कियों को बाहर निकलने, अपने जुनून को पूरा करने और चमकने का मौका मिलेगा.

