राष्ट्रीय स्तर पर विपक्षी दल BJP के खिलाफ एकजुट होने की कोशिश कर रहे हैं. इसी बीच पश्चिम बंगाल में फिर यह सवाल उठ रहा है कि क्या CPM और तृणमूल कांग्रेस (TMC) साथ आ सकते हैं. यह सवाल इसलिए और अहम हो जाता है क्योंकि राज्य में जल्द ही निकाय चुनाव होने वाले हैं.
हालांकि CPM के राज्य सचिव मोहम्मद सलीम ने फिलहाल किसी चुनावी समझौते की संभावना से इनकार किया है. उनका कहना है कि TMC और ममता बनर्जी को पहले अपने ‘पिछले पापों’ का हिसाब देना होगा.
साथ ही सलीम ने कहा कि CPM सभी वामपंथी ताकतों को एक साथ लाने की कोशिश करेगी और बंगाल में स्थानीय स्तर पर ‘समान विचार रखने वाली राजनीतिक ताकतों और लोगों’ के साथ काम करेगी. अर्कमय दत्ता मजूमदार से उनकी बातचीत के अश:
राष्ट्रीय स्तर पर विपक्षी दल BJP के खिलाफ मिलकर लड़ने की कोशिश कर रहे हैं. ऐसे में क्या राज्य स्तर पर CPM और TMC के बीच गठबंधन हो सकता है?
ममता बनर्जी को अपने पुराने किए की कीमत चुकानी पड़ रही है. CPM ने अप्रैल 2022 में कन्नूर में हुई पार्टी कांग्रेस में तय किया था कि BJP के खिलाफ एकजुट होकर लड़ाई लड़ी जानी चाहिए. लेकिन यह भी साफ था कि पश्चिम बंगाल और केरल में चुनावी गठबंधन नहीं हो सकता क्योंकि इन दोनों राज्यों में हम क्रमशः तृणमूल और कांग्रेस के खिलाफ चुनाव लड़ रहे हैं.
इस सितंबर में हमारे महासचिव एम.ए. बेबी ने TMC, आम आदमी पार्टी, द्रविड़ मुनेत्र कड़गम और कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) समेत कई विपक्षी दलों को पत्र लिखा. इसका मकसद खास तौर पर मुख्य चुनाव आयुक्त की विश्वसनीयता के मुद्दे पर BJP के खिलाफ मिलकर लड़ने के लिए सभी को साथ लाना था. ममता बनर्जी ने तुरंत जवाब दिया और बेबी से फोन पर बात भी की.
ममता बनर्जी का इस तरह सक्रिय होना उनकी मौजूदा स्थिति को देखते हुए समझ में आता है. वे किसी भी तरह खुद को राजनीति में प्रासंगिक बनाए रखना चाहती हैं. राष्ट्रीय राजनीति में अपनी जगह बनाए रखने के लिए वे संसद जाने का रास्ता भी तलाश सकती हैं. लेकिन अगर वे इस साल पश्चिम बंगाल का चुनाव जीत गई होतीं तो शायद इतनी सक्रियता नहीं दिखातीं.
इसलिए अभी बंगाल में TMC के साथ गठबंधन का कोई सवाल नहीं है. ममता बनर्जी को पहले अपने अतीत और अपने पापों का हिसाब देना होगा.
हम जानते हैं कि इंडिया ब्लॉक और व्यापक विपक्ष की कई अहम ताकतें हमसे सहमत नहीं हैं. दूसरे मुद्दों पर वे हमारे साथ हैं लेकिन वे बंगाल की राजनीतिक हकीकत को नहीं समझते.
BJP पहले ही कह रही है कि बंगाल में होने वाले निकाय चुनावों के लिए CPM, TMC और कांग्रेस साथ आएंगे.
जाहिर है, BJP ऐसा कहेगी क्योंकि इससे उसे फायदा होता है. लोग ममता बनर्जी और उनकी पार्टी से बहुत नाराज हैं. बंगाल में जिस तरह का भ्रष्टाचार, राजनीतिक हिंसा, वसूली और मनमानी उन्होंने की, उसे लोग भूले नहीं हैं. BJP गठबंधन की ऐसी बात करके लोगों को गुमराह कर रही है और उन्हें हमसे दूर करना चाहती है.
ममता बनर्जी के शासन में मुस्लिम मतदाताओं को हमेशा उनके साथ मानकर चला गया. एक तरह से यह अलिखित समझ थी कि मुसलमान उन्हें ही वोट देंगे. BJP के मामले में भी हिंदुओं को इसी तरह अपने साथ मानकर चला जा रहा है.
लेकिन पूरे राज्य में हमारी गतिविधियां बढ़ी हैं. बड़ी संख्या में लोग हमारे कार्यक्रमों में आ रहे हैं. BJP इससे परेशान है. यही वजह है कि वह हमारे कार्यक्रमों को निशाना बना रही है. 2 अक्टूबर को उत्तर दमदम में हुए कार्यक्रम के अलावा इससे पहले बोंगांव सबडिविजन और कूचबिहार में भी ऐसा किया गया.
ये शरणार्थी इलाके हैं, जहां गरीब और निचली जातियों के हिंदू रहते हैं. ये लोग अब हमारी ओर आ रहे हैं. गठबंधन की यह झूठी बात फैलाने से BJP लोगों को गुमराह कर सकती है.
निकाय चुनावों के लिए वाम दलों की क्या रणनीति है?
सबसे पहले सभी वामपंथी ताकतों को एक साथ लाना होगा. इसके बाद समान विचार रखने वाली राजनीतिक ताकतों और लोगों को साथ लाया जाएगा. ऐसे लोगों को चुनाव लड़ने के लिए हमारा समर्थन मिलेगा जिनकी अलग-अलग वर्गों के लोगों के बीच स्वीकार्यता है और जो हमारी विचारधारा से जुड़े हैं. अभी एक व्यापक वाम गठबंधन की जरूरत है.
12 अक्टूबर को बंगाल में BJP सरकार के उस फैसले के खिलाफ एक विशेष सम्मेलन आयोजित किया जा रहा है जिसमें कार्ल मार्क्स, व्लादिमीर लेनिन और हो ची मिन्ह जैसे दुनिया के प्रसिद्ध नेताओं के नाम पर बनी सड़कों के नाम बदल दिए गए हैं. ये वही लोग हैं जिनकी तारीफ नेताजी सुभाष चंद्र बोस, भगत सिंह और रवींद्रनाथ टैगोर जैसे भारतीय दिग्गजों ने भी की थी.
इस सम्मेलन का पर्चा सोशलिस्ट यूनिटी सेंटर ऑफ इंडिया-कम्युनिस्ट (SUCI) ने जारी किया है. यह वही वामपंथी पार्टी है जिसने हमारे खिलाफ जमकर लड़ाई लड़ी है. लेकिन आज की जरूरत को देखते हुए हम साथ आ रहे हैं.
जल्द ही एक गैर-राजनीतिक सम्मेलन भी आयोजित किया जाएगा. इसमें पूर्व नौकरशाह, राजनीतिक नेता, वकील, जज, पत्रकार और मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से प्रभावित लोग अपनी बात रखेंगे.
दुर्गा पूजा के दौरान लगने वाले किताबों के स्टॉल का क्या होगा? BJP और उससे जुड़े संगठन इनके खिलाफ हैं.
इस बार पिछले साल से ज्यादा स्टॉल लगाए जाएंगे. इन्हें सुरक्षित रखने के लिए हमारी पूरी तैयारी है. अगर कुछ होता है तो हम उसके लिए तैयार रहेंगे. इस बार लंबे समय बाद इतने कई सारी किताबें स्टॉल पर दिखेंगी.

