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कैसे रखा जाता है रामलाल के चढ़ावे का हिसाब-किताब; कहां दिखी गड़बड़ी?

राम मंदिर के चढ़ावे में कथित गड़बड़ी की जांच ने आस्था, पारदर्शिता और जवाबदेही पर बहस छेड़ दी है. करोड़ों के दान प्रबंधन पर उठे सवालों ने सियासी विवाद भी गरमा दिया

अयोध्या के राम मंदिर में हर दिन करीब 42 लाख रुपए का चढ़ावा आता है
अपडेटेड 9 जून , 2026

अयोध्या में भगवान रामलला के भव्य मंदिर का निर्माण केवल एक धार्मिक परियोजना नहीं बल्कि करोड़ों हिंदुओं की आस्था, भावनाओं और दशकों लंबे संघर्ष का प्रतीक माना जाता है. ऐसे में जब राम मंदिर के दानपात्र से प्राप्त चढ़ावे में कथित गड़बड़ी और गबन के आरोप सामने आए तो यह मामला केवल वित्तीय अनियमितता तक सीमित नहीं रहा बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा और राजनीतिक बहस का विषय बन गया.

राम मंदिर को प्रतिदिन लाखों श्रद्धालुओं से करोड़ों रुपए का चढ़ावा प्राप्त होता है. यही वजह है कि चढ़ावे से जुड़े किसी भी विवाद का सीधा संबंध जनता के विश्वास से जुड़ जाता है. फिलहाल मामला जांच के दायरे में है लेकिन आरोपों और सफाइयों के बीच कई ऐसे सवाल खड़े हो गए हैं जिनका जवाब जांच पूरी होने के बाद ही सामने आ सकेगा.

आखिर क्या है पूरा मामला?

जानकारी के अनुसार रामलला को प्राप्त नकद दान की गणना के दौरान कुछ कर्मचारियों की तरफ लगातार धनराशि में हेरफेर किए जाने की आशंका सामने आई. बताया जा रहा है कि दान की गिनती वाले गोपनीय कक्ष में लगाए गए कुछ छिपे हुए सीसीटीवी कैमरों की निगरानी के दौरान संदिग्ध गतिविधियां दिखाई दीं. इसके बाद चार कर्मचारियों को चिन्हित कर पूछताछ शुरू की गई.

जांच से जुड़े लोगों का दावा है कि मामले में ट्रस्ट से जुड़े कुछ कर्मचारियों के अलावा दो बैंककर्मियों की भूमिका भी संदेह के घेरे में आई है. हालांकि अभी तक बैंक कर्मचारियों से औपचारिक पूछताछ नहीं हुई है. जांच एजेंसियां फिलहाल गिनती और जमा प्रक्रिया से जुड़े लोगों से जानकारी जुटा रही हैं. सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि आधिकारिक तौर पर अभी तक किसी रकम के गबन की पुष्टि नहीं की गई है. इसके बावजूद जांच के दायरे और गोपनीयता ने मामले को और अधिक चर्चित बना दिया है.

जब सामने आया राजनीतिक विवाद

मामले ने उस समय राजनीतिक रंग पकड़ लिया जब समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर राम मंदिर के चढ़ावे की करोड़ों रुपए की रकम गायब होने का आरोप लगाया. उन्होंने इसे सनातन समाज की आस्था से जुड़ा गंभीर मामला बताते हुए अदालत से स्वतः संज्ञान लेने की मांग की. अखिलेश यादव ने सवाल उठाया कि यदि इतनी बड़ी राशि में गड़बड़ी हुई है तो जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही. उन्होंने सरकार की चुप्पी को भी संदिग्ध बताया.

इस बयान के बाद यह मामला सीधे राजनीति के केंद्र में आ गया. भारतीय जनता पार्टी (BJP) और सपा के बीच आरोप-प्रत्यारोप शुरू हो गए. विपक्ष ने पारदर्शिता की मांग की तो सत्ता पक्ष और ट्रस्ट से जुड़े लोगों ने आरोपों को समय से पहले निष्कर्ष निकालने की कोशिश बताया. श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि ट्रस्ट की वित्तीय व्यवस्था नियमित ऑडिट प्रक्रिया के अधीन है. उनके अनुसार ट्रस्ट और स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के प्रतिनिधियों की मौजूदगी में समय-समय पर आंतरिक ऑडिट किया जाता है.

चंपत राय ने स्पष्ट किया कि वर्तमान में भी ऑडिट की प्रक्रिया चल रही है और अभी तक ऐसी कोई बात सामने नहीं आई है जिससे करोड़ों रुपए के गायब होने की पुष्टि होती हो. उन्होंने कहा कि जांच और ऑडिट की प्रक्रिया को राजनीतिक आरोपों से प्रभावित नहीं किया जाना चाहिए. उधर ट्रस्ट के न्यासी और निर्मोही अखाड़े के महंत दिनेंद्र दास ने भी कहा कि अगर किसी व्यक्ति ने कोई गलती की है तो उसे दंड अवश्य मिलेगा, लेकिन पूरे ट्रस्ट की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाना उचित नहीं है.

कितना चढ़ावा मिलता है राम मंदिर को?

इस विवाद को समझने के लिए यह जानना जरूरी है कि राम मंदिर में दान की मात्रा कितनी बड़ी है. श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार वित्त वर्ष 2024-25 में ट्रस्ट की कुल आय 327 करोड़ रुपए रही. इसमें लगभग 153 करोड़ रुपए दान के रूप में प्राप्त हुए जबकि करीब 173 करोड़ रुपए विभिन्न बैंक खातों और निवेशों से प्राप्त ब्याज के रूप में आए.

यदि केवल दान राशि को देखा जाए तो यह प्रतिदिन औसतन 41.92 लाख रुपए बैठती है. यानी हर घंटे लगभग 1.75 लाख रुपए और हर मिनट करीब 2,900 रुपए से अधिक का चढ़ावा रामलला को प्राप्त हुआ. यह औसत आंकड़ा है. त्योहारों, विशेष अवसरों और सप्ताहांत में यह राशि कई गुना बढ़ जाती है. जनवरी 2024 में मंदिर उद्घाटन के बाद पहले ही दिन लगभग 3.17 करोड़ रुपए का चढ़ावा प्राप्त हुआ था. फरवरी 2024 में 11 दिनों के भीतर करीब 11 करोड़ रुपए दान के रूप में मिले थे. इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि यहां आने वाली नकदी की मात्रा बेहद विशाल है. ऐसे में गिनती और निगरानी व्यवस्था की विश्वसनीयता अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है.

कैसे होती है दान की गिनती? कहां पैदा हुआ संदेह?

रामजन्मभूमि परिसर में विभिन्न मंदिरों के सामने लगभग 40 दान पेटिकाएं रखी गई हैं. इसके अलावा कंप्यूटरीकृत काउंटर और ऑनलाइन दान की व्यवस्था भी मौजूद है. श्रद्धालु नकद, चेक, ऑनलाइन ट्रांसफर अथवा अन्य रूपों में दान कर सकते हैं. दान पेटिकाओं से प्राप्त नकदी को निर्धारित प्रक्रिया के तहत एक गोपनीय कक्ष तक पहुंचाया जाता है. यहां सीसीटीवी निगरानी में गिनती होती है. इस काम में ट्रस्ट के प्रतिनिधियों और बैंक से जुड़े कर्मचारियों की संयुक्त टीम शामिल रहती है.

जानकारी के अनुसार दान की गिनती के लिए स्टेट बैंक ऑफ इंडिया अधिकृत संस्था है. बैंक ने इस काम के लिए एक निजी एजेंसी को अनुबंधित किया हुआ है, जिसके कर्मचारी भी परिसर में तैनात रहते हैं. नोट गिनने की मशीनों के साथ-साथ सिक्कों की मैनुअल गिनती भी की जाती है. कई बार भारी मात्रा में नकदी आने पर यह प्रक्रिया 24 घंटे तक चलती रहती है. गिनती पूरी होने के बाद रकम को कड़ी सुरक्षा के बीच बैंक खाते में जमा कराया जाता है. यही वह बिंदु है जहां से विवाद की शुरुआत हुई.

जांच से जुड़े सूत्रों के मुताबिक गिनती कक्ष में लगे कुछ कैमरों में ऐसी गतिविधियां दिखाई दीं जिनसे धनराशि के संभावित हेरफेर की आशंका बनी. इसके बाद कुछ कर्मचारियों को चिन्हित कर पूछताछ शुरू की गई. बताया जा रहा है कि जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं गिनती के दौरान रकम का कुछ हिस्सा व्यवस्थित तरीके से अलग तो नहीं किया जा रहा था. हालांकि अभी तक कोई आधिकारिक जांच रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं हुई है और न ही किसी निश्चित रकम के गबन की पुष्टि की गई है. यही कारण है कि एक तरफ जांच जारी है तो दूसरी तरफ ट्रस्ट और पुलिस दोनों सार्वजनिक तौर पर सावधानी बरत रहे हैं.

आस्था बनाम पारदर्शिता

राम मंदिर से जुड़ा यह विवाद केवल वित्तीय मामला नहीं है. यह उस भरोसे से जुड़ा विषय है जिसके आधार पर लाखों लोग अपनी मेहनत की कमाई का हिस्सा भगवान राम को अर्पित करते हैं. धार्मिक संस्थानों में पारदर्शिता की मांग कोई नई बात नहीं है.

देश के कई बड़े मंदिरों में समय-समय पर दान प्रबंधन को लेकर सवाल उठते रहे हैं. लेकिन राम मंदिर की स्थिति अलग है क्योंकि यह राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर करोड़ों लोगों की भावनाओं से जुड़ा केंद्र है. फिलहाल पूरे मामले में कई दावे और प्रतिदावे सामने हैं, लेकिन अंतिम सच अभी जांच की परतों में छिपा हुआ है.

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